Cactus Farming: सूखे और बंजर जमीन में खेती के लिए वरदान है कैक्टस, जाने कैसे करें इसकी खेती FREE

Cactus Farming

Cactus Farming – वर्तमान समय में कैक्टस को लोग गमले में बड़ी शौक से पौधे के रूप में लगाते हैं लेकिन आपको बता दे कि कैक्टस सिर्फ शौक की चीज नहीं है। आप इसकी खेती कर अच्छा खासा मुनाफा भी कमा सकते है। कैक्टस एक ऐसा पौधा है जो रेगिस्तानी इलाकों में भी उगता जिसे ऊट के साथ-साथ है कई सारे जानवर खाते है। 

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Cactus Farming इसी कैक्टस को देखकर अब बिना कांटे वाली इसकी कई किस्म की पौध विकसित की गई है जो गाय, भैंस, भेड़, बकरियां आदि को आसानी से खिलाया जाता है। बात करें कैक्टस के पौधे के बारे में तो इसमें पौष्टिक तत्व की मात्रा काफ़ी ज्यादा भरी हुई रहती है जिसे चारे के रूप में खाकर पशुओं का स्वास्थ बेहतर होता है। इसके अलावा इस चारे को दूध वाले पशुओं को खिलाने पर दूध की मात्रा भी बढता है। 

Cactus Farming

Cactus Farming कैक्टस की खेती की खास बात यह है कि इस खेती में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। आप इस सूखे इलाकों में भी उगा सकते हैं। ऐसे में अगर आप कैक्टस की खेती करने को लेकर इच्छुक है तो आज का यह पोस्ट है आपके लिए लाभदायक होने वाला है। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको कैक्टस की खेती (Cactus Farming) से जुडी पूरी जानकारी देने वाले हैं तो आप पोस्ट में अंत तक बने रहे।

कैक्टस सूखे और बंजर जमीन मे खेती के लिए उपयोगी – Cactus Farming

Cactus Farming वर्तमान समय में कैक्टस से प्राप्त होने वाले बायोमास को विभिन्न उत्पादों में बदलकर इससे विभिन्न उत्पादों का स्रोत बनाया जा रहा है जिसमें मुख्य तौर पर मादक पेय, अचार, साबुन, शैंपू, सॉस, लोशन, मुरब्बा, जूस, अमृत, कैंडी आदि कैक्टस के जरिए आय का एक साधन बनता जा रहा है। 

Cactus Farming इसके अलावा कैक्टस की खेती में सबसे जरूरी बात यह है कि इसकी खेती करने में ज्यादा सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं होती है। किसान इसे बड़े पैमाने में सुखी बंजर जमीन या फिर रेतीली जगह पर आसानी से कर सकता है। जैसा कि हमने आपको बताया कैक्टस बड़े ही मात्रा बायोमास उत्पन्न करता है तो वह किसानों के लिए खेती में उपयोगी होता है इसको किसान खाद के रूप में खेतों में डालते हैं जिसे बेहतर पैदावार भी होता है। 

पशुओं के लिए उपयोगी है कैक्टस
Cactus Farming

Cactus Farming कैक्टस जितना ही ज्यादा बायोमास उत्पन्न करने में माहिर है उतना ही यह पशुओं के लिए उपयोगी साबित होता है। ग्रामीण विकास और डेयरी पशुओं पर कार्य करने वाली बीएफ पूना, नावर्ड के साथ मिलकर एक परियोजना चल रही है जिसके अनुसार किसान वर्तमान समय में अपनी बकरियों, भैंसे, गायों इत्यादि को कैक्टस को खिलाने के लिए उपयोग कर रहे हैं।

Cactus Farming बीएफ पूना के अनुसार बकरियां प्रतिदिन 3 से 4 किलो कैक्टस खाने में सक्षम होती है जबकि दुग्ध उत्पादन करने वाली गाय, भैंस प्रतिदिन 7 से 8 किलो कैक्टस खा सकती है। कैक्टस को पशुओं को खिलाने से दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी होता है साथ ही धीरे-धीरे पशुओं का शरीर भी फैलने लगता है।

बिना कांटे वाली अन्य किस्म के कैक्टस
Cactus Farming

Cactus Farming बात करें कैक्टस के अन्य किस्म के बारे में तो वर्तमान समय में भारत में कैक्टस 1270, कैक्टस 1271, कैक्टस 1308 मौजूद है। इसके अलावा भारत में Apuntia Ficus Indica है जिसे कैक्टस नाशपाती और इंडिया फिग जिसे नागफनी के नाम से जाना जाता है इन प्रजातियों के कैक्टस भारत में मौजूद है जिनमें कांटे नहीं होते हैं। इसकी खेती में बहुत ही कम मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है इसलिए इसे आसानी से रेगिस्तान या फिर बंजार, सूखे जैसे इलाकों में उगाया जा सकता है।   

कैक्टस की खेती करने के तरीके check

भारत में वर्षा आधारित क्षेत्र में कैक्टस को उगाया जाता है जहां पानी की न्यूनतम मात्रा उपलब्ध होती है। हमारे देश में शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्र में जैसे की बंजर जमीन, रेगिस्तान, हरि मिट्टी इत्यादि जैसे जगह पर इसकी खेती की जा सकती है। भारत में मुख्य तौर पर कैक्टस की खेती जून से लेकर नवंबर महीने तक बुवाई की जाती है। 

कैक्टस की खेती करने के लिए इसे 60 से 80 सेंटीमीटर गहरी जुताई करने के पश्चात प्रति एकड़ जमीन पर 6 टन तक कंपोस्ट खाद डालने होता है। इसके बाद प्रति एकड़ जमीन पर 72 किलो यूरिया, 15 किलो एमओपी, 15 किलो डीएपी डाला जाता है। बात करें इसकी बुवाई की तो कैक्टस के पौधों को 1 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए।

वहीं प्रति पौधों के गड्ढे 40 सेंटीमीटर तक रखना होता है। कैक्टस के पौधे 1 मीटर तक बढ़ाने में 5 से 6 महीने का समय लेते हैं। इसके बाद तने को काटना भी चाहिए जो 5 से 6 महीने की अंतराल पर इसकी कटाई की जाती है। इसमें मुख्य तौर पर हर साल प्रति एकड़ जमीन पर 20 टन हरा चारा मिलता है।

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