Sweet Potato Cultivation 2024: शकरकंद की खेती में होगा लाखों का मुनाफा, जाने इसके खेती का राज FREE

Sweet Potato Cultivation – यदि आप एक किसान हैं और आप फल, सब्जियां इत्यादि की खेती करते हैं तो आज हम आपको एक ऐसी खेती के बारे में बताने वाले हैं जिसको अगर आप करते हैं तो आने वाले समय में लाखों की कमाई कर सकते हैं। आज हम बात कर रहे हैं शकरकंद की खेती (Sweet Potato Cultivation) के बारे में जिसे भारत में शकरकंद या शकरिया के नाम से जाना जाता है। 

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Sweet Potato Cultivation शकरकंद की खेती मुख्य तौर पर भारत में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों के किसान बड़े पैमाने में करते हैं। वर्तमान समय में शकरकंद को भारत सहित विदेश में भी अत्यधिक पसंद किया जाता है। ऐसे में अगर आप शकरकंद की खेती कर लाखों की कमाई कर सकते हैं। आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको शकरकंद की खेती (Sweet Potato Cultivation) कैसे करें? से जुड़े संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

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शकरकंद की खेती में होगा लाखों का मुनाफा – Sweet Potato Cultivation
Sweet Potato Cultivation

Sweet Potato Cultivation शकरकंद या शकरिया के नाम से मशहूर जो प्राकृतिक रूप से मिट्टी के अंदर उगने वाली मीठी जड़ की सब्जी है। यह पूरे भारत में बाजार में देखने को मिलता है लेकिन इसकी खेती सर्दियों के मौसम में ज्यादातर किया जाता है। आलू की तरह दिखने वाला यह शकरकंद मुख्य तौर पर भारत के कुछ चुनिंदा राज्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। वर्तमान समय में भारत शकरकंद का निर्यात काफी बड़े पैमाने पर कर रहा है। इसके निर्यात में धीरे-धीरे और इजाफा देखने को मिला मिल रहा है। 

वर्तमान समय में भारत शकरकंद के निर्यात की सूची में छठे स्थान पर मौजूद है लेकिन जिस प्रकार से किसानों का शकरकंद की खेती की ओर आकर्षण हो रहा है बहुत ही जल्द भारत चीन को पीछे छोड़ पहले स्थान पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में अगर आप अपने जमीन पर शकरकंद की खेती (Sweet Potato Cultivation) करते हैं तो प्रति हेक्टेयर जमीन पर आप लाखों की कमाई कर सकते हैं।

शकरकंद की खेती के पैदावार एवं होने वाला कमाई
Sweet Potato Cultivation

शकरकंद की खेती (Sweet Potato Cultivation) को आलू की तरह किया जाता है। आलू की अपेक्षा इसमें स्टार्च और मीठा की मात्रा अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है। इसकी मांग बाजार में हमेशा रहती है इस वजह से शकरकंद की खेती को किसान बड़े पैमाने पर करते हैं। शकरकंद की बुवाई करने के पश्चात 125 से 130 दिनों के अंदर शकरकंद तैयार हो जाता है। इस पौधे की पत्तियां जब पीले रंग की दिखाई देने लगती है उस दौरान शकरकंद की खुदाई की जाती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान प्रति हेक्टेयर भूमि पर 25 टन तक शकरकंद का उत्पादन कर सकता है। यदि बाजार में इसे  10 से 15 रुपए भाव पर भी बचा जाए तो किसान आसानी से 2 लाख से 3 लाख रुपए कम सकता है। बात करें इसके लागत की तो प्रति हेक्टेयर जमीन पर आपको केवल 75 हजार रुपए का लागत देखने को मिलता है। ऐसे में आप शकरकंद की खेती कर आने वाले समय में लाखों की कमाई कर सकते हैं।

शकरकंद की रोपाई/बुवाई कैसे करें?
Sweet Potato Cultivation

शकरकंद की खेती मुख्य तौर पर अप्रैल से जुलाई के महीने में किया जाता है। जब गर्मी और बारिश का मौसम होता है तथा इसकी खेती को जनवरी-फरवरी महीने में तैयार किया जाता है। शकरकंद की अच्छी पैदावार एवं बढ़िया गुणवत्ता वाला शकरकंद प्राप्त करने के लिए इसके कंदो को बैलों मदद से बुवाई डालियों पर की जाती है। 

शकरकंद की बुवाई करते समय मुख्य तौर पर क्यूरिया के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी रखना होता है तथा हर पौधों के बीच एक फीट की दूरी रखा जाता है। वही इसके कंदो को 15 से 20 सेंटीमीटर की गहराई में किया जाता है।

शकरकंद की खेती के लिए उर्वरक, खाद एवं सिंचाई check

शकरकंद के अच्छे उपज के लिए इसमें खाद उर्वरक एवं समय पर सिंचाई करने की आवश्यकता होती है। खेती को तैयार करते समय जैविक खाद के रूप में सड़े हुए गोबर को डालने का आवश्यकता होता है। इसके अलावा 60 किलोग्राम तक नाइट्रोजन, 30 से 50 किलो तक फास्फोरस और 25 से 50 किलो तक पोटाश प्रति हेक्टेयर जमीन पर देना अच्छा माना जाता है। 

शकरकंद की बुवाई करने के बाद समय समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। वही उसके बाद शकरकंद में तीन से चार बार सिंचाई की आवश्यकता होती है वही बारिश के मौसम में इसमें ज्यादा सिंचाई की ज्यादा आवश्यकता नहीं होता है।

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