Watermelon Farming Guide : इस तरीके से करें तरबूज की खेती, होगी मोटी कमाई, देखे free

Watermelon Farming Guide – तरबूज की खेती को हमारे देश के किसान अक्सर गर्मियों के मौसम में करते हैं। इस दौरान तरबूज की मांग बाजार में अत्यधिक होता है। ऐसे में किसान इस खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं अगर आप भी एक किसान है तो आप तरबूज की खेती कर 2 से 3 लाख आसानी से कमा सकते हैं।

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Watermelon Farming Guide तरबूज की खेती किसानों के आय को बढ़ाने का एक बेहतर स्रोत है। अधिकांश किसान तरबूज़ की खेती करते हैं जिसकी रोपाई करने के बाद इसकी कटाई 78 से 90 दिन के अंतराल पर किया जाता है। अगर आप भी तरबूज की खेती करने को लेकर इच्छुक है तो आज का यह पोस्ट आपके लिए लाभदायक होने वाला है हमने नीचे तरबूज की खेती से जुड़े संपूर्ण जानकारी दिया है।

Watermelon Farming Guide

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किसान इस तरीके से करें तरबूज की खेती होगी मोटी कमाई – Watermelon Farming Guide

Watermelon Farming Guide हमारे देश के किसान तरबूज की खेती को मुख्य तौर पर व्यवसाय के लिए करते हैं जिस वजह से इसका उत्पादन किस बड़ी मात्रा में करते हैं। तरबूज ग्रीष्म ऋतु का एक फल होता है जिस समय बाजार में इसकी मांग अत्यधिक होती है। इसी वजह से इसकी खेती मुख्य तौर पर गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों में किया जाता है तरबूज की खेती करने में मुख्य तौर पर इसके जलवायु को भी ध्यान में रखा जाता है।

Watermelon Farming Guide साथ ही तरबूज की खेती किसी उपजाऊ मिट्टी में किया जाता है जिससे इसकी अच्छी पैदावार हो सके। तरबूज का पौधा शुष्क जलवायु वाला पौधा होता है जिसकी वजह से इसकी खेती कम आद्रता वाले प्रदेशों में किया जा रहा है। इसका पौधा गर्मी और सर्दी दोनों ही जलवायु का होता है, तरबूज के पौधे अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन करने में सक्षम होता है।

तरबूज की खेती कैसे करे?
Watermelon Farming Guide

Watermelon Farming Guide तरबूज की खेती करने के लिए सबसे पहले खेत की जुताई कर उसे अच्छी तरह से तैयार कर लिया जाता है। इसके लिए आरंभ में सबसे पहले खेत की गहरी जुताई की जाती है। इसके बाद खेत से पुराने फसलों के अवशेष को साफ किया जाता है फिर कुछ दिनों के लिए मिट्टी में धूप लगने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है। जब मिट्टी सूख जाता है तो उसके बाद इसमें गोबर को खाद के रूप में डाला जाता है फिर दो-तीन बार अच्छी तरह से जुताई की जाती है और जिसे मिट्टी और गोबर एक तरह से मिल जाती है।

Watermelon Farming Guide मिट्टी को पूरी तरह से तैयार करने के बाद इसमें पानी छोड़ा जाता है पानी छोड़ने के बाद मिट्टी जब मिट्टी ऊपर से सुखी दिखाई देने लगता है तब फिर से एक बार खेत की जुताई की जाती है। पूरी तरह से मिट्टी तैयार हो जाने के बाद खेत में पट्टा लगाकर इसे समतल कर दिया जाता है। इसके बाद समतल भूमि में 5 से 6 फीट की दूरी पर नाली नुमा क्योरिया तैयार किया जाता है और गोबर की खाद के साथ फास्फोरस, पोटाश जैसे उर्वरक उचित मात्रा में मिट्टी में मिलाकर गढ़ों में भर दिया जाता है इसके बाद तरबुज के बीजों को छोड़ा जाता है।

तरबूज के बीजों को बोने का सही समय और तरीका
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Watermelon Farming Guide सबसे पहले आपको बता दे कि तरबूज के बीजों की रोपाई बीज के रूप में की जाती है। तरबूज खेती भारत के मैदानी भागों में बड़ी मात्रा में उगाया जाता है। तरबूज की खेती एक हेक्टेयर के खेत में करीबन 4 से 5 KG बीजों की आवश्यकता पड़ता है। इन बीजों को तैयार किए गए गड्ढे में दो से तीन फीट की दूरी पर 1.5 सेंटीमीटर की गहराई में लगाया जाता है। 

इसके खेत में जल भराव का विशेष तौर पर ध्यान रखा जाता है इसलिए बीजों की रोपाई के पश्चात गधों को पारदर्शी पॉलिथीन से ढक दिया जाता है और पॉलिथीन में कुछ दूरी पर हल्के हल्के छेद कर दिए जाते हैं। जिससे इसके गड्ढे में जल भराव का खतरा कम हो जाता है साथ ही पौधों को सूर्य का प्रकाश भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है। तरबूज के बीजों की रोपाई मुख्य तौर पर फरवरी मार्च महीने के लिए सही समय माना जाता है। इससे किसानों को अधिक मात्रा में उत्पादन होता है और वह तरबूज़ को सही समय पर कटाई कर बाजार में अधिक कीमतों पर बेचा जा सके।

तरबूज़ के हाइब्रिड किस्म की बीजों की करें बुवाई कम समय में होगी मोटी कमाई

Watermelon Farming Guide दोस्तों यदि आप तरबूज की खेती करने को लेकर इच्छुक है तो इसमें प्रति एकड़ जमीन पर साधारण किस्म के बीजों चार से पांच केजी की आवश्यकता होती है जबकि आप हाइब्रिड किस्म के बीजों का उपयोग करते हैं तो उसमें 300 से 500 ग्राम की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा आप हाइब्रिड किस्म के वैसे बीज का उपयोग करे जो कम समय उपज दे ऐसे बीजों का उपयोग कर आप कम समय में अधिक मुनाफा कम सकता है। 

रोग कीटो से ऐसे कैसे करें फसल का बचाव check

Watermelon Farming Guide अगर आप तरबूज के फसलों की खेती करते हैं तो आपको तरबूज को रोग और कीटों से बचाए रखने की आवश्यकता है। तरबूज में अमूमन रोग पत्तियों से शुरू होता है बाद में यही पति नीचे की तरफ बढ़ते चले जाता है जिसके बाद पत्तियों की सतह पर पहुंच जाता है। इस स्थिति में पत्तिया धीरे-धीरे सफेद होने लगती है, बाद में रोग अधिक बढ़ने की स्थिति में पत्तिया पीली दिखने लगती है। आप इस स्थिति में दवा का छिड़काव कर तरबूज के कीटों को बचा सकते हैं, शुरुआत में आप हर 15 दिन में दो-तीन बार दवा का छिड़काव करें।

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